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सोमवार, 12 जुलाई 2021

Education India - Study by primary education

 Education India - Study by India primary education


86 percent of the schools in India are in the villages of the country. Government of India data and the independent survey revealed

भारत में 86 प्रतिशत स्कूल देश के गांवों में हैं। भारत सरकार के  आंकड़े और स्वतंत्र सर्वे से पता चला है

The primary education system in India 

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The primary education system in India-

भारत में अन्य देशों की तुलना में शिक्षित लोगों का प्रतिशत काफी कम है । इग्लैंड, रुस तथा जापान में लगभग शत-प्रतिशत जनसंख्या साक्षर है । यूरोप एवं अमेरिका में साक्षरता का प्रतिशत 90 से 100 के बीच है जबकि भारत में 2001 में साक्षरता का प्रतिशत 65.50 है ।

The Percentage Of Education People In India Is Very Less as Compared to Other Countries In England Russia 100% Of the Population Is Literate The Literacv Percentage in Europe and 90 and America is between 90 and 100 while in India Literacy rate in 2001 is 65.50

1951, 1961 तथा 1971 की जनगणना म shiksha दर की गणना करते समय पांच वर्ष या उससे ऊपर की आयु के व्यक्तियों को सम्मानित किया गया है अर्थात न वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को निरक्षर किया गया है चाहे वे किसी भो स्तर की शिक्षा ग्रहण किए हैं ।

In the census of 1951, 1961 and 1971, while calculating the literacy rate, persons of the age of five years or above have been honored i.e. all children below the age of nine years have been illiterate irrespective of the level of education they have taken. have done.

2001 की जनगणना में उस  साक्षर माना गया है जो किसी भाषा को पढ़ लिख अथवा समझ सकता है । साक्षर होने के लिए यह जरुरी नहीं है कि व्यक्ति ने कोई  शिक्षा प्राप्त की हो या कोई परीक्षा पास की हो ।

In the 2001 census, a person is considered literate who can read, write or understand any language. To be literate, it is not necessary that a person has received any formal education or passed any examination.[The primary education system in India]

सन् 1976 में भारतीय संविधान में किए गए संशोधन के बाद शिक्षा केन्द्र और राज्यों की साक्षर जिम्मेदारी बन गई है । शिक्षा प्रणाली और उसके ढांचे के बारे में फैसले आमतौर पर राज्य ही करते हैं । लेकिन शिक्षा के स्वरुप और गुणवत्ता का दायित्व स्पष्ट रुप से केन्द्र सरकार का ही है ।

After the amendment made in the Indian Constitution in 1976, education has become the literate responsibility of the Center and the states. The decisions about the education system and its structure are usually taken by the state. But the responsibility of the nature and quality of education clearly rests with the Central Government.

सन् 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति तथा 1992 की मार्च योजना में 21वीं शताब्दी के प्रारम्भ होने से पहले ही देश में चौदह वर्ष तक के सभी बच्चों को संतोषजनक गुणवत्ता के साथ नि:शुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध अन्तर्गत सरकार की वचनवद्वंता के अनुसार सकल घरेलू उत्पाद का छ: प्रतिशत शिक्षा के क्षेत्र के लिए खर्च किया जाएगा इस धनराशि का 50: प्राथमिक शिक्षा पर व्यय किया जाएगा ।

According to the Government's commitment under the National Education Policy of 1986 and the March Plan of 1992, before the beginning of the 21st century, free and compulsory education with satisfactory quality is available to all children in the country up to the age of fourteen. Six percent will be spent on education, 50 percent of this amount will be spent on primary education.

8 वीं पंचवर्षीय योजना में शिक्षा के लिए योजना खर्च बढ़ाकर 19,600 करोड़ रुपए कर दिया गया जबकि पहली योजना में यह 153 करोड़ रुपए था । सकल घेरलू उत्पाद के प्रतिशत की दृष्टि से शिक्षा पर खर्च  के 0.7 प्रतिशत से बढ्‌कर 1997-98 में 3.6 प्रतिशत हो गया ।

The plan expenditure for education was increased to Rs 19,600 crore in the Eighth Five Year Plan as against Rs 153 crore in the First Plan. The expenditure on education as a percentage of gross domestic product increased from 0.7 percent in 1951-52 to 3.6 percent in 1997-98.(The primary education system in India)

9 वीं योजना में शिक्षा खर्च 20,381.65 करोड़ रुपए रखा गया । इसमें 4,526.75 करोड़ रुपए का वह प्रावधान शामिल नहीं है जो नौवीं पंचवर्षीय योजना के अन्तिम तीन वर्षों में प्राथमिक स्कूलों में पोषाहार सहायता के लिए किया गया।

Education expenditure in the 9th plan was kept at Rs 20,381.65 crore. This does not include the provision of Rs 4,526.75 crore for nutritional support in primary schools during the last three years of the Ninth Five Year Plan.

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प्राथमिक शिक्षा: Primary education:-

वर्ष -1999-2000 में केवल  केन्द्रीय योजना खर्च का 64.6 प्रतिशत  बजट प्राथमिक शिक्षा पर खर्च के लिए निर्धारित किया गया । भारतीय राष्ट्रीय शिक्षा नीति में संकल्प किया गया कि २१ वीं शताब्दी के शुरु होने से पहले देश में 14  वर्ष के आयु में सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा की  गुणवत्ता की दृष्टि से सन्तोषजनक शिक्षा उपलब्ध कराई जाए । 8 वीं पंचवर्षीय योजना में सभी के  लिए प्राथमिक शिक्षा के लक्ष्य के बारे में प्रमुख रुप से तीन मानदण्ड निर्धारित किए गए हैं – सार्वभौम पंहुच, सार्वभौम धारणा, सार्वभौम उपलब्धि ।और अनिवार्य बाल शिक्षा की  गुणवत्ता की दृष्टि से सन्तोषजनक शिक्षा उपलब्ध कराई जाए । 8 वीं पंचवर्षीय योजना में सभी के  लिए प्राथमिक शिक्षा के लक्ष्य के बारे में प्रमुख रुप से तीन मानदण्ड निर्धारित किए गए हैं – सार्वभौम पंहुच, सार्वभौम धारणा, सार्वभौम उपलब्धि ।

In the year -1999-2000, only 64.6% of the Central Plan expenditure was earmarked for the expenditure on primary education. It was resolved in the Indian National Education Policy that before the beginning of the 21st century, all children in the country at the age of 14 years should be free of cost. And the quality of compulsory child education should be provided satisfactory education. In the 8th Five Year Plan, three main criteria have been set regarding the goal of primary education for all – universal access, universal perception, universal achievement.(The primary education system in India)

भारतीय केंद्रीय  और राज्य सरकारों द्वारा किए गए प्रयासों के  फलस्वरुप देश की 94 प्रतिशत ग्रामीण आबादी को एक किलोमीटर के दायरे में कम से कम एक प्राथमिक  विद्यालय और 84 प्रतिशत ग्रामीण आबादी तीन किलोमीटर के दायरे में एक माध्यमिक उच्च प्राकृतिक विद्यालय उपलब्ध कराया गया । 

As a result of the efforts made by the Indian Central and State Governments, 94 percent of the rural population of the country has been provided with at least one primary school within a radius of one kilometer and 84 percent of the rural population within a radius of three kilometers has been provided with a secondary higher natural school. (The primary education system in India)



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